जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही | कबीर के दोहे – Kabir ke dohe in Hindi

जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही | कबीर के दोहे – Kabir ke dohe in Hindi


जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही ।
सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माही ।

भावार्थ: कबीर दास जी कहते हैं कि जब मेरे अंदर अहंकारमैं था, तब मेरे ह्रदय में हरीईश्वर का वास नहीं था। और अब मेरे ह्रदय में हरीईश्वर का वास है तो मैंअहंकार नहीं है। जब से मैंने गुरु रूपी दीपक को पाया है तब से मेरे अंदर का अंधकार खत्म हो गया है।


jab maim tha tab hari nahim, ab hari hai maim naahi
sab am dhiyaara mit gaya, dipak dekha maahi

bhaavaarth: kabir daas ji kahate hain ki jab mere andar ahankaaramaim tha, tab mere hraday mein hariishvar ka vaas nahim thaa. aur ab mere hraday mein hariishvar ka vaas hai to maimahankaar nahim hai. jab se maimne guru roopi dipak ko paaya hai tab se mere andar ka andhakaar khatm ho gaya hai.


200संत कबीर के दोहों का संग्रह अर्थ सहित –Click Here

Leave a Comment