कागा का को धन हरे, कोयल का को देय | संत कबीर के दोहे – Kabir ke dohe in Hindi

कागा का को धन हरे, कोयल का को देय | संत कबीर के दोहे – Kabir ke dohe in Hindi


कागा का को धन हरे, कोयल का को देय ।
मीठे वचन सुना के, जग अपना कर लेय ।

भावार्थ: कबीर दास जी कहते हैं कि कौआ किसी का धन नहीं चुराता लेकिन फिर भी कौआ लोगों को पसंद नहीं होता। वहीँ कोयल किसी को धन नहीं देती लेकिन सबको अच्छी लगती है। ये फर्क है बोली का – कोयल मीठी बोली से सबके मन को हर लेती है।


kaaga ka ko dhan hare, koyal ka ko dey
mit he vachan suna ke, jag apana kar ley

bhaavaarth: kabir daas ji kahate hain ki kaua kisi ka dhan nahin churaata lekin phir bhi kaua logom ko pasand nahin hotaa. vahim koyal kisi ko dhan nahin deti lekin sabako achchhi lagati hai. ye phark hai boli ka – koyal mit hi boli se sabake man ko har leti hai.


200संत कबीर के दोहों का संग्रह अर्थ सहित –Click Here

Leave a Comment